श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.63.53

दशम स्कन्ध · अध्याय 63 · अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायः

य एवं कृष्णविजयं शंकरेण च संयुगम्।

संस्मरेत् प्रातरुत्थाय न तस्य स्यात् पराजयः॥ ५३

ya evaṃ kṛṣṇavijayaṃ śaṃkareṇa ca saṃyugam|

saṃsmaret prātarutthāya na tasya syāt parājayaḥ|| 53

अर्थ

परीक्षित्! जो पुरुष श्रीशंकरजीके साथ भगवान् श्रीकृष्णका युद्ध और उनकी विजयकी कथाका प्रातःकाल उठकर स्मरण करता है, उसकी पराजय नहीं होती॥ ५३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे १ उत्तरार्धे
ऽनिरुद्धानयनं नाम त्रिषष्टितमोऽध्यायः॥ ६३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    न्धे बाणासुरसंग्रामे कृष्णविजयः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 536)

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