श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.63.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 63 · अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायः

बाहुषुच्छिद्यमानेषु बाणस्य भगवान् भवः।

भक्तानुकम्प्युपव्रज्य चक्रायुधमभाषत॥ ३३

bāhuṣucchidyamāneṣu bāṇasya bhagavān bhavaḥ|

bhaktānukampyupavrajya cakrāyudhamabhāṣata|| 33

अर्थ

जब भक्तवत्सल भगवान् शंकरने देखा कि बाणासुरकी भुजाएँ कट रही हैं, तब वे चक्रधारी भगवान् श्रीकृष्णके पास आये और स्तुति करने लगे॥ ३३॥

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