भगवान् श्रीकृष्णने इसलिये कि कहीं उसपर दृष्टि न पड़ जाय, अपना मुँह फेर लिया और वे दूसरी ओर देखने लगे। तबतक बाणासुर धनुष कट जाने और रथहीन हो जानेके कारण अपने नगरमें चला गया॥ २१॥✎ 2123
ततस्तिर्यङ्मुखो नग्नामनिरीक्षन् गदाग्रजः।
बाणश्च तावद् विरथश्छिन्नधन्वाविशत् पुरम्॥ २१
भगवान् श्रीकृष्णने इसलिये कि कहीं उसपर दृष्टि न पड़ जाय, अपना मुँह फेर लिया और वे दूसरी ओर देखने लगे। तबतक बाणासुर धनुष कट जाने और रथहीन हो जानेके कारण अपने नगरमें चला गया॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 532) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/21/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)