बलरामजीने अपने मूसलकी चोटसे कुम्भाण्ड और कूपकर्णको घायल कर दिया, वे रणभूमिमें गिर पड़े। इस प्रकार अपने सेनापतियोंको हताहत देखकर बाणासुरकी सारी सेना तितर-बितर हो गयी॥ १६॥
कुम्भाण्डः कूपकर्णश्च पेततुर्मुसलार्दितौ।
दुद्रुवुस्तदनीकानि हतनाथानि सर्वतः॥ १६
बलरामजीने अपने मूसलकी चोटसे कुम्भाण्ड और कूपकर्णको घायल कर दिया, वे रणभूमिमें गिर पड़े। इस प्रकार अपने सेनापतियोंको हताहत देखकर बाणासुरकी सारी सेना तितर-बितर हो गयी॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.63.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 531) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/63/16/