श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.63.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 63 · अथ त्रिषष्टितमोऽध्यायः

ब्रह्मास्त्रस्य च ब्रह्मास्त्रं वायव्यस्य च पार्वतम्।

आ‌ग्‍नेयस्य च पार्जन्यं नैजं पाशुपतस्य च॥ १३

brahmāstrasya ca brahmāstraṃ vāyavyasya ca pārvatam|

āgneyasya ca pārjanyaṃ naijaṃ pāśupatasya ca|| 13

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने ब्रह्मास्त्रकी शान्तिके लिये ब्रह्मास्त्रका, वायव्यास्त्रके लिये पार्वतास्त्रका, आ‌ग्‍नेयास्त्रके लिये पर्जन्यास्त्रका और पाशुपतास्त्रके लिये नारायणास्त्रका प्रयोग किया॥ १३॥

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