श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

तत्र सुप्तं सुपर्यंके प्राद्युम्‍निं योगमास्थिता।

गृहीत्वा शोणितपुरं सख्यै प्रियमदर्शयत्॥ २३

tatra suptaṃ suparyaṃke prādyumniṃ yogamāsthitā|

gṛhītvā śoṇitapuraṃ sakhyai priyamadarśayat|| 23

अर्थ

वहाँ अनिरुद्धजी बहुत ही सुन्दर पलँगपर सो रहे थे। चित्रलेखा योगसिद्धिके प्रभावसे उन्हें उठाकर शोणितपुर ले आयी और अपनी सखी ऊषाको उसके प्रियतमका दर्शन करा दिया॥ २३॥✎ 1697

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1697 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: प्राण-वल्लभको → प्राणवल्लभको

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