श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.62.10

दशम स्कन्ध · अध्याय 62 · अथ द्विषष्टितमोऽध्यायः

तच्छ्रुत्वा भगवान् क्रुद्धः केतुस्ते भज्यते यदा।

त्वद्दर्पघ्नं भवेन्मूढ संयुगं मत्समेन ते॥ १०

tacchrutvā bhagavān kruddhaḥ ketuste bhajyate yadā|

tvaddarpaghnaṃ bhavenmūḍha saṃyugaṃ matsamena te|| 10

अर्थ

बाणासुरकी यह प्रार्थना सुनकर भगवान् शंकरने तनिक क्रोधसे कहा—‘रे मूढ़! जिस समय तेरी ध्वजा टूटकर गिर जायगी, उस समय मेरे ही समान योद्धासे तेरा युद्ध होगा और वह युद्ध तेरा घमंड चूर-चूर कर देगा’॥ १०॥

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