श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

चारुचन्द्रो विचारुश्‍च चारुश्‍च दशमो हरेः।

प्रद्युम्‍नप्रमुखा जाता रुक्मिण्यां नावमाः पितुः॥ ९

cārucandro vicāruśca cāruśca daśamo hareḥ|

pradyumnapramukhā jātā rukmiṇyāṃ nāvamāḥ pituḥ|| 9

अर्थ

रुक्मिणीके गर्भसे दस पुत्र हुए—प्रद्युम्‍न, चारुदेष्ण, सुदेष्ण, पराक्रमी चारुदेह, सुचारु, चारुगुप्त, भद्रचारु, चारुचन्द्र, विचारु और दसवाँ चारु। ये अपने पिता भगवान् श्रीकृष्णसे किसी बातमें कम न थे॥ ८-९॥

यह अर्थ श्लोक 8–9 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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