श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

तासां१ या दशपुत्राणां कृष्णस्त्रीणां पुरोदिताः।

अष्टौ महिष्यस्तत्पुत्रान् प्रद्युम्‍नादीन् गृणामि ते॥ ७

tāsāṃ yā daśaputrāṇāṃ kṛṣṇastrīṇāṃ puroditāḥ|

aṣṭau mahiṣyastatputrān pradyumnādīn gṛṇāmi te|| 7

अर्थ

परीक्षित्! मैं कह चुका हूँ कि भगवान् श्रीकृष्णकी प्रत्येक पत्‍नीके दस-दस पुत्र थे। उन रानियोंमें आठ पटरानियाँ थीं, जिनके विवाहका वर्णन मैं पहले कर चुका हूँ। अब उनके प्रद्युम्‍न आदि पुत्रोंका वर्णन करता हूँ॥ ७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    आसां।

    (मुद्रित पृष्ठ 521)

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