उस समय आकाशवाणीने कहा—‘यदि धर्मपूर्वक कहा जाय, तो बलरामजीने ही यह दाँव जीता है। रुक्मीका यह कहना सरासर झूठ है कि उसने जीता है’॥ ३३॥✎ 1696
तदाब्रवीन्नभोवाणी बलेनैव जितो ग्लहः।
धर्मतो वचनेनैव रुक्मी वदति वै मृषा॥ ३३
उस समय आकाशवाणीने कहा—‘यदि धर्मपूर्वक कहा जाय, तो बलरामजीने ही यह दाँव जीता है। रुक्मीका यह कहना सरासर झूठ है कि उसने जीता है’॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.61.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 524) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/61/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)