चार भुजाओंवाले वे भगवान् उसी समय पलँगसे उतर पड़े और रुक्मिणीजीको उठा लिया तथा उनके खुले हुए केशपाशोंको बाँधकर अपने शीतल करकमलोंसे उनका मुँह पोंछ दिया॥ २६॥
पर्यंकादवरुह्याशु तामुत्थाप्य चतुर्भुजः।
केशान् समुह्य तद्वक्त्रं प्रामृजत् पद्मपाणिना॥ २६
चार भुजाओंवाले वे भगवान् उसी समय पलँगसे उतर पड़े और रुक्मिणीजीको उठा लिया तथा उनके खुले हुए केशपाशोंको बाँधकर अपने शीतल करकमलोंसे उनका मुँह पोंछ दिया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.60.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 513) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/60/26/