श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तासामविरतं कृष्णे कुर्वतीनां सुतेक्षणम्।

न पुनः कल्पते राजन् संसारोऽज्ञानसम्भवः॥ ४०

tāsāmavirataṃ kṛṣṇe kurvatīnāṃ sutekṣaṇam|

na punaḥ kalpate rājan saṃsāro'jñānasambhavaḥ|| 40

अर्थ

राजन्! वे गौएँ और गोपियाँ, जो नित्य-निरन्तर भगवान् श्रीकृष्णको अपने पुत्रके ही रूपमें देखती थीं, फिर जन्म-मृत्युरूप संसारके चक्रमें कभी नहीं पड़ सकतीं; क्योंकि यह संसार तो अज्ञानके कारण ही है॥ ४०॥

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