श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पयांसि यासामपिबत् पुत्रस्नेहस्नुतान्यलम्।

भगवान् देवकीपुत्रः कैवल्याद्यखिलप्रदः॥ ३९

payāṃsi yāsāmapibat putrasnehasnutānyalam|

bhagavān devakīputraḥ kaivalyādyakhilapradaḥ|| 39

अर्थ

परीक्षित्! देवकीनन्दन भगवान् कैवल्य आदि सब प्रकारकी मुक्ति और सब कुछ देनेवाले हैं। उन्होंने व्रजकी गोपियों और गौओंका वह दूध, जो भगवान्‌के प्रति पुत्र-भाव होनेसे वात्सल्य-स्नेहकी अधिकताके कारण स्वयं ही झरता रहता था, भरपेट पान किया॥ ३९॥

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