श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

किं पुनः श्रद्धया भक्त्या कृष्णाय परमात्मने।

यच्छन् प्रियतमं किं नु रक्तास्तन्मातरो यथा॥ ३६

kiṃ punaḥ śraddhayā bhaktyā kṛṣṇāya paramātmane|

yacchan priyatamaṃ kiṃ nu raktāstanmātaro yathā|| 36

अर्थ

ऐसी स्थितिमें जो परब्रह्म परमात्मा भगवान् श्रीकृष्णको श्रद्धा और भक्तिसे माताके समान अनुरागपूर्वक अपनी प्रिय-से-प्रिय वस्तु और उनको प्रिय लगनेवाली वस्तु समर्पित करते हैं, उनके सम्बन्धमें तो कहना ही क्या है॥ ३६॥✎ 2060

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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