श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पूतना लोकबालघ्नी राक्षसी रुधिराशना।

जिघांसयापि हरये स्तनं दत्त्वाऽऽप सद्गतिम्॥ ३५

pūtanā lokabālaghnī rākṣasī rudhirāśanā|

jighāṃsayāpi haraye stanaṃ dattvā''pa sadgatim|| 35

अर्थ

पूतना एक राक्षसी थी। लोगोंके बच्चोंको मार डालना और उनका खून पी जाना—यही उसका काम था। भगवान्‌को भी उसने मार डालनेकी इच्छासे ही स्तन पिलाया था । फिर भी उसे वह परमगति मिली, जो सत्पुरुषोंको मिलती है॥ ३५॥✎ 2060

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