॥ श्रीहरिः ॥
इन्द्रियाणि हृषीकेशः प्राणान् नारायणोऽवतु।
श्वेतद्वीपपतिश्चित्तं मनो योगेश्वरोऽवतु॥ २४
indriyāṇi hṛṣīkeśaḥ prāṇān nārāyaṇo'vatu|
śvetadvīpapatiścittaṃ mano yogeśvaro'vatu|| 24
अर्थ
हृषीकेशभगवान् इन्द्रियोंकी और नारायण प्राणोंकी रक्षा करें। श्वेतद्वीपके अधिपति चित्तकी और योगेश्वर मनकी रक्षा करें॥ २४॥
इन्द्रियाणि हृषीकेशः प्राणान् नारायणोऽवतु।
श्वेतद्वीपपतिश्चित्तं मनो योगेश्वरोऽवतु॥ २४
हृषीकेशभगवान् इन्द्रियोंकी और नारायण प्राणोंकी रक्षा करें। श्वेतद्वीपके अधिपति चित्तकी और योगेश्वर मनकी रक्षा करें॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 159) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/24/