पूतना नामकी एक बड़ी क्रूर राक्षसी थी। उसका एक ही काम था—बच्चोंको मारना। कंसकी आज्ञासे वह नगर, ग्राम और अहीरोंकी बस्तियोंमें बच्चोंको मारनेके लिये घूमा करती थी॥ २॥✎ 1654
कंसेन प्रहिता घोरा पूतना बालघातिनी।
शिशूंश्चचार निघ्नन्ती पुरग्रामव्रजादिषु॥ २
पूतना नामकी एक बड़ी क्रूर राक्षसी थी। उसका एक ही काम था—बच्चोंको मारना। कंसकी आज्ञासे वह नगर, ग्राम और अहीरोंकी बस्तियोंमें बच्चोंको मारनेके लिये घूमा करती थी॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 155) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)