श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

कंसेन प्रहिता घोरा पूतना बालघातिनी।

शिशूंश्‍चचार निघ्नन्ती पुरग्रामव्रजादिषु॥ २

kaṃsena prahitā ghorā pūtanā bālaghātinī|

śiśūṃścacāra nighnantī puragrāmavrajādiṣu|| 2

अर्थ

पूतना नामकी एक बड़ी क्रूर राक्षसी थी। उसका एक ही काम था—बच्चोंको मारना। कंसकी आज्ञासे वह नगर, ग्राम और अहीरोंकी बस्तियोंमें बच्चोंको मारनेके लिये घूमा करती थी॥ २॥✎ 1654

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1654 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: कुच-कलश → कुचकलश

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