श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तस्याः स्वनेनातिगभीररंहसा

साद्रिर्मही द्यौश्‍च चचाल सग्रहा।

रसा दिशश्‍च प्रतिनेदिरे जनाः

पेतुः क्षितौ वज्रनिपातशंकया॥ १२

tasyāḥ svanenātigabhīraraṃhasā

sādrirmahī dyauśca cacāla sagrahā|

rasā diśaśca pratinedire janāḥ

petuḥ kṣitau vajranipātaśaṃkayā|| 12

अर्थ

उसकी चिल्लाहटका वेग बड़ा भयंकर था। उसके प्रभावसे पहाड़ोंके साथ पृथ्वी और ग्रहोंके साथ अन्तरिक्ष डगमगा उठा। सातों पाताल और दिशाएँ गूँज उठीं। बहुत-से लोग वज्रपातकी आशंकासे पृथ्वीपर गिर पड़े॥ १२॥

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