॥ श्रीहरिः ॥
ऐरावतकुलेभांश्च चतुर्दन्तांस्तरस्विनः।
पाण्डुरांश्च चतुःषष्टिं प्रेषयामास केशवः॥ ३७
airāvatakulebhāṃśca caturdantāṃstarasvinaḥ|
pāṇḍurāṃśca catuḥṣaṣṭiṃ preṣayāmāsa keśavaḥ|| 37
अर्थ
ऐरावतके वंशमें उत्पन्न हुए अत्यन्त वेगवान् चार-चार दाँतोंवाले सफेद रंगके चौंसठ हाथी भी भगवान्ने वहाँसे द्वारका भेजे॥ ३७॥
ऐरावतकुलेभांश्च चतुर्दन्तांस्तरस्विनः।
पाण्डुरांश्च चतुःषष्टिं प्रेषयामास केशवः॥ ३७
ऐरावतके वंशमें उत्पन्न हुए अत्यन्त वेगवान् चार-चार दाँतोंवाले सफेद रंगके चौंसठ हाथी भी भगवान्ने वहाँसे द्वारका भेजे॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 508) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/59/37/