परीक्षित्! यदुवंशियोंने और राजा नग्नजित्के बैलोंने पहले बहुत-से राजाओंका बल-पौरुष धूलमें मिला दिया था। जब उन राजाओंने यह समाचार सुना, तब उनसे भगवान् श्रीकृष्णकी यह विजय सहन न हुई। उन लोगोंने नाग्नजिती सत्याको लेकर जाते समय मार्गमें भगवान् श्रीकृष्णको घेर लिया॥ ५३॥
श्रुत्वैतद् रुरुधुर्भूपा नयन्तं पथि कन्यकाम्।
भग्नवीर्याः सुदुर्मर्षा यदुभिर्गोवृषैः पुरा॥ ५३
परीक्षित्! यदुवंशियोंने और राजा नग्नजित्के बैलोंने पहले बहुत-से राजाओंका बल-पौरुष धूलमें मिला दिया था। जब उन राजाओंने यह समाचार सुना, तब उनसे भगवान् श्रीकृष्णकी यह विजय सहन न हुई। उन लोगोंने नाग्नजिती सत्याको लेकर जाते समय मार्गमें भगवान् श्रीकृष्णको घेर लिया॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 502) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/53/