श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.46

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

बद‍्ध्वा तान् दामभिः शौरिर्भ‌ग्‍नदर्पान् हतौजसः।

व्यकर्षल्लीलया बद्धान् बालो दारुमयान् यथा॥ ४६

baddhvā tān dāmabhiḥ śaurirbhagnadarpān hataujasaḥ|

vyakarṣallīlayā baddhān bālo dārumayān yathā|| 46

अर्थ

इससे बैलोंका घमंड चूर हो गया और उनका बल-पौरुष भी जाता रहा। अब भगवान् श्रीकृष्ण उन्हें रस्सीसे बाँधकर इस प्रकार खींचने लगे, जैसे खेलते समय नन्हा-सा बालक काठके बैलोंको घसीटता है॥ ४६॥

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