श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तां श्रुत्वा वृषजिल्लभ्यां भगवान् सात्वतां पतिः।

जगाम कौसल्यपुरं सैन्येन महता वृतः॥ ३४

tāṃ śrutvā vṛṣajillabhyāṃ bhagavān sātvatāṃ patiḥ|

jagāma kausalyapuraṃ sainyena mahatā vṛtaḥ|| 34

अर्थ

जब यदुवंशशिरोमणि भगवान् श्रीकृष्णने यह समाचार सुना कि जो पुरुष उन बैलोंको जीत लेगा, उसे ही सत्या प्राप्त होगी; तब वे बहुत बड़ी सेना लेकर कोसलपुरी (अयोध्या) पहुँचे॥ ३४॥✎ 1693

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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