इसके बाद पाण्डवोंकी प्रार्थनासे भगवान् श्रीकृष्णने पाण्डवोंके रहनेके लिये एक अत्यन्त अद्भुत और विचित्र नगर विश्वकर्माके द्वारा बनवा दिया॥ २४॥
यदैव कृष्णः सन्दिष्टः पार्थानां परमाद्भुतम्।
कारयामास नगरं विचित्रं विश्वकर्मणा॥ २४
इसके बाद पाण्डवोंकी प्रार्थनासे भगवान् श्रीकृष्णने पाण्डवोंके रहनेके लिये एक अत्यन्त अद्भुत और विचित्र नगर विश्वकर्माके द्वारा बनवा दिया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 499) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/24/