श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

यदैव कृष्णः सन्दिष्टः पार्थानां परमाद्भुतम्।

कारयामास नगरं विचित्रं विश्‍वकर्मणा॥ २४

yadaiva kṛṣṇaḥ sandiṣṭaḥ pārthānāṃ paramādbhutam|

kārayāmāsa nagaraṃ vicitraṃ viśvakarmaṇā|| 24

अर्थ

इसके बाद पाण्डवोंकी प्रार्थनासे भगवान् श्रीकृष्णने पाण्डवोंके रहनेके लिये एक अत्यन्त अद्भुत और विचित्र नगर विश्‍वकर्माके द्वारा बनवा दिया॥ २४॥

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