मेरा नाम है कालिन्दी। यमुनाजलमें मेरे पिता सूर्यने मेरे लिये एक भवन भी बनवा दिया है। उसीमें मैं रहती हूँ। जबतक भगवान्का दर्शन न होगा, मैं यहीं रहूँगी’॥ २२॥
कालिन्दीति समाख्याता वसामि यमुनाजले।
निर्मिते भवने पित्रा यावदच्युतदर्शनम्॥ २२
मेरा नाम है कालिन्दी। यमुनाजलमें मेरे पिता सूर्यने मेरे लिये एक भवन भी बनवा दिया है। उसीमें मैं रहती हूँ। जबतक भगवान्का दर्शन न होगा, मैं यहीं रहूँगी’॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 499) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/22/