श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

कालिन्दीति समाख्याता वसामि यमुनाजले।

निर्मिते भवने पित्रा यावदच्युतदर्शनम्॥ २२

kālindīti samākhyātā vasāmi yamunājale|

nirmite bhavane pitrā yāvadacyutadarśanam|| 22

अर्थ

मेरा नाम है कालिन्दी। यमुनाजलमें मेरे पिता सूर्यने मेरे लिये एक भवन भी बनवा दिया है। उसीमें मैं रहती हूँ। जबतक भगवान्‌का दर्शन न होगा, मैं यहीं रहूँगी’॥ २२॥

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