कालिन्दीने कहा—‘मैं भगवान् सूर्यदेवकी पुत्री हूँ। मैं सर्वश्रेष्ठ वरदानी भगवान् विष्णुको पतिके रूपमें प्राप्त करना चाहती हूँ और इसीलिये यह कठोर तपस्या कर रही हूँ॥ २०॥
अहं देवस्य सवितुर्दुहिता पतिमिच्छती।
विष्णुं वरेण्यं वरदं तपः परममास्थिता॥ २०
कालिन्दीने कहा—‘मैं भगवान् सूर्यदेवकी पुत्री हूँ। मैं सर्वश्रेष्ठ वरदानी भगवान् विष्णुको पतिके रूपमें प्राप्त करना चाहती हूँ और इसीलिये यह कठोर तपस्या कर रही हूँ॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.58.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 498) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/58/20/