बलरामजीने कहा—‘इसमें सन्देह नहीं कि शतधन्वाने स्यमन्तकमणिको किसी-न-किसीके पास रख दिया है। अब तुम द्वारका जाओ और उसका पता लगाओ॥ २३॥
तत आह बलो नूनं स मणिः शतधन्वना।
कस्मिंश्चित् पुरुषे न्यस्तस्तमन्वेष पुरं व्रज॥ २३
बलरामजीने कहा—‘इसमें सन्देह नहीं कि शतधन्वाने स्यमन्तकमणिको किसी-न-किसीके पास रख दिया है। अब तुम द्वारका जाओ और उसका पता लगाओ॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.57.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 494) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/57/23/