श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तं विलोक्य जना दूरात्तेजसा मुष्टदृष्टयः।

दीव्यतेऽक्षैर्भगवते शशंसुः सूर्यशंकिताः॥ ५

taṃ vilokya janā dūrāttejasā muṣṭadṛṣṭayaḥ|

dīvyate'kṣairbhagavate śaśaṃsuḥ sūryaśaṃkitāḥ|| 5

अर्थ

दूरसे ही उसे देखकर लोगोंकी आँखें उसके तेजसे चौंधिया गयीं। लोगोंने समझा कि कदाचित् स्वयं भगवान् सूर्य आ रहे हैं। उन लोगोंने भगवान्‌के पास आकर उन्हें इस बातकी सूचना दी। उस समय भगवान् श्रीकृष्ण चौसर खेल रहे थे॥ ५॥

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