अन्तमें भगवान् श्रीकृष्णके घूँसोंकी चोटसे जाम्बवान्के शरीरकी एक-एक गाँठ टूट-फूट गयी। उत्साह जाता रहा। शरीर पसीनेसे लथपथ हो गया। तब उन्होंने अत्यन्त विस्मित—चकित होकर भगवान् श्रीकृष्णसे कहा—॥ २५॥✎ 2114
कृष्णमुष्टिविनिष्पातनिष्पिष्टांगोरुबन्धनः ।
क्षीणसत्त्वः स्विन्नगात्रस्तमाहातीव विस्मितः॥ २५
अन्तमें भगवान् श्रीकृष्णके घूँसोंकी चोटसे जाम्बवान्के शरीरकी एक-एक गाँठ टूट-फूट गयी। उत्साह जाता रहा। शरीर पसीनेसे लथपथ हो गया। तब उन्होंने अत्यन्त विस्मित—चकित होकर भगवान् श्रीकृष्णसे कहा—॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 488) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/56/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)