परीक्षित्! जाम्बवान् उस समय कुपित हो रहे थे। उन्हें भगवान्की महिमा, उनके प्रभावका पता न चला। उन्होंने उन्हें एक साधारण मनुष्य समझ लिया और वे अपने स्वामी भगवान् श्रीकृष्णसे युद्ध करने लगे॥ २२॥✎ 2114
स वै भगवता तेन युयुधे स्वामिनाऽऽत्मनः।
पुरुषं प्राकृतं मत्वा कुपितो नानुभाववित्॥ २२
परीक्षित्! जाम्बवान् उस समय कुपित हो रहे थे। उन्हें भगवान्की महिमा, उनके प्रभावका पता न चला। उन्होंने उन्हें एक साधारण मनुष्य समझ लिया और वे अपने स्वामी भगवान् श्रीकृष्णसे युद्ध करने लगे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 488) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/56/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)