भगवान्ने वहाँ जाकर देखा कि श्रेष्ठ मणि स्यमन्तकको बच्चोंका खिलौना बना दिया गया है। वे उसे हर लेनेकी इच्छासे बच्चेके पास जा खड़े हुए॥ २०॥✎ 2114
तत्र दृष्ट्वा मणिश्रेष्ठं बालक्रीडनकं कृतम्।
हर्तुं कृतमतिस्तस्मिन्नवतस्थेऽर्भकान्तिके॥ २०
भगवान्ने वहाँ जाकर देखा कि श्रेष्ठ मणि स्यमन्तकको बच्चोंका खिलौना बना दिया गया है। वे उसे हर लेनेकी इच्छासे बच्चेके पास जा खड़े हुए॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 488) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/56/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)