श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

राजोवाच

सत्राजितः किमकरोद् ब्रह्मन् कृष्णस्य किल्बिषम्।

स्यमन्तकः कुतस्तस्य कस्माद् दत्ता सुता हरेः॥ २

satrājitaḥ kimakarod brahman kṛṣṇasya kilbiṣam|

syamantakaḥ kutastasya kasmād dattā sutā hareḥ|| 2

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! सत्राजित्‍ने भगवान् श्रीकृष्णका क्या अपराध किया था? उसे स्यमन्तकमणि कहाँसे मिली? और उसने अपनी कन्या उन्हें क्यों दी?॥ २॥

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