श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.56.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 56 · अथ षट्पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

प्रसेनं सहयं हत्वा मणिमाच्छिद्य केसरी।

गिरिं विशञ्जाम्बवता निहतो मणिमिच्छता॥ १४

prasenaṃ sahayaṃ hatvā maṇimācchidya kesarī|

giriṃ viśañjāmbavatā nihato maṇimicchatā|| 14

अर्थ

वहाँ एक सिंहने घोड़े सहित प्रसेनको मार डाला और उस मणिको छीन लिया। वह अभी पर्वतकी गुफामें प्रवेश कर ही रहा था कि मणिके लिये ऋक्षराज जाम्बवान्‍ने उसे मार डाला॥ १४॥

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