परमसुन्दरी रुक्मिणीजीने देखा कि उनके पति श्रीकृष्णकी सेना बाण-वर्षासे ढक गयी है। तब उन्होंने लज्जाके साथ भयभीत नेत्रोंसे भगवान् श्रीकृष्णके मुखकी ओर देखा॥ ४॥✎ 16882111
पत्युर्बलं शरासारैश्छन्नं वीक्ष्य सुमध्यमा।
सव्रीडमैक्षत्तद्वक्त्रं भयविह्वललोचना॥ ४
परमसुन्दरी रुक्मिणीजीने देखा कि उनके पति श्रीकृष्णकी सेना बाण-वर्षासे ढक गयी है। तब उन्होंने लज्जाके साथ भयभीत नेत्रोंसे भगवान् श्रीकृष्णके मुखकी ओर देखा॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 474) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)