श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.54.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 54 · अथ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

ततो रथादवप्लुत्य खड्गपाणिर्जिघांसया।

कृष्णमभ्यद्रवत् क्रुद्धः पतंग इव पावकम्॥ ३०

tato rathādavaplutya khaḍgapāṇirjighāṃsayā|

kṛṣṇamabhyadravat kruddhaḥ pataṃga iva pāvakam|| 30

अर्थ

अब रुक्मी क्रोधवश हाथमें तलवार लेकर भगवान् श्रीकृष्णको मार डालनेकी इच्छासे रथसे कूद पड़ा और इस प्रकार उनकी ओर झपटा, जैसे पतिंगा आगकी ओर लपकता है॥ ३०॥

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