neṣye vīryamadaṃ yena svasā me prasabhaṃ hṛtā|| 22
अर्थ
आज मैं अपने तीखे बाणोंसे उस खोटी बुद्धिवाले ग्वालेके बल-वीर्यका घमंड चूर-चूर कर दूँगा। देखो तो उसका साहस, वह हमारी बहिनको बलपूर्वक हर ले गया है’॥ २२॥
अद्याहं निशितैर्बाणैर्गोपालस्य सुदुर्मतेः।
नेष्ये वीर्यमदं येन स्वसा मे प्रसभं हृता॥ २२
आज मैं अपने तीखे बाणोंसे उस खोटी बुद्धिवाले ग्वालेके बल-वीर्यका घमंड चूर-चूर कर दूँगा। देखो तो उसका साहस, वह हमारी बहिनको बलपूर्वक हर ले गया है’॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 476) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/22/