अनुक्रमणिका दशम स्कन्ध (उत्तरार्ध) अध्याय 51 श्लोक 64 ॥ श्रीहरिः ॥
जन्मन्यनन्तरे राजन् सर्वभूतसुहृत्तमः।
भूत्वा द्विजवरस्त्वं वै मामुपैष्यसि केवलम्॥ ६४
janmanyanantare rājan sarvabhūtasuhṛttamaḥ|
bhūtvā dvijavarastvaṃ vai māmupaiṣyasi kevalam|| 64
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राजन्! अगले जन्ममें तुम ब्राह्मण बनोगे और समस्त प्राणियोंके सच्चे हितैषी, परम सुहृद् होओगे तथा फिर मुझ विशुद्ध विज्ञानघन परमात्माको प्राप्त करोगे’॥ ६४॥
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे उत्तरार्धे मुचुकुन्दस्तुतिर्नामैकपञ्चाशत्तमोऽध्यायः॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.64 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 460) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/64/
मुद्रित ग्रन्थमें: द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 460
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जन्मन्यनन्तरे राजन् सर्वभूतसुहृत्तमः।
भूत्वा द्विजवरस्त्वं वै मामुपैष्यसि केवलम्॥ ६४
राजन्! अगले जन्ममें तुम ब्राह्मण बनोगे और समस्त प्राणियोंके सच्चे हितैषी, परम सुहृद् होओगे तथा फिर मुझ विशुद्ध विज्ञानघन परमात्माको प्राप्त करोगे’॥ ६४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.51.64 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 460) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/51/64/