॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.51.14
श्रीशुक उवाच
स इक्ष्वाकुकुले जातो मान्धातृतनयो महान्।
मुचुकुन्द इति ख्यातो ब्रह्मण्यः सत्यसंगरः॥ १४
sa ikṣvākukule jāto māndhātṛtanayo mahān|
mucukunda iti khyāto brahmaṇyaḥ satyasaṃgaraḥ|| 14
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! वे इक्ष्वाकुवंशी महाराजा मान्धाताके पुत्र राजा मुचुकुन्द थे। वे ब्राह्मणोंके परम भक्त, सत्यप्रतिज्ञ, संग्रामविजयी और महापुरुष थे॥ १४॥