मेरे अवतारका यही प्रयोजन है कि मैं पृथ्वीका बोझ हलका कर दूँ, साधु-सज्जनोंकी रक्षा करूँ और दुष्ट-दुर्जनोंका संहार॥ ९॥✎ 1682
एतदर्थोऽवतारोऽयं भूभारहरणाय मे।
संरक्षणाय साधूनां कृतोऽन्येषां वधाय च॥ ९
मेरे अवतारका यही प्रयोजन है कि मैं पृथ्वीका बोझ हलका कर दूँ, साधु-सज्जनोंकी रक्षा करूँ और दुष्ट-दुर्जनोंका संहार॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 446) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)