॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.50.38
शंखदुन्दुभयो नेदुर्भेरीतूर्याण्यनेकशः।
वीणावेणुमृदंगानि पुरं प्रविशति प्रभौ॥ ३८
śaṃkhadundubhayo nedurbherītūryāṇyanekaśaḥ|
vīṇāveṇumṛdaṃgāni puraṃ praviśati prabhau|| 38
अर्थ
जिस समय भगवान् श्रीकृष्णने नगरमें प्रवेश किया, उस समय वहाँ शंख, नगारे, भेरी, तुरही, वीणा, बाँसुरी और मृदंग आदि बाजे बजने लगे थे॥ ३८॥✎ 1683