श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

हतेषु सर्वानीकेषु नृपो बार्हद्रथस्तदा।

उपेक्षितो भगवता मगधान् दुर्मना ययौ॥ ३५

hateṣu sarvānīkeṣu nṛpo bārhadrathastadā|

upekṣito bhagavatā magadhān durmanā yayau|| 35

अर्थ

परीक्षित्! उस समय मगधराज जरासन्धकी सारी सेना मर चुकी थी। भगवान् बलरामजीने उपेक्षापूर्वक उसे छोड़ दिया था, इससे वह बहुत उदास होकर अपने देश मगधको चला गया॥ ३५॥

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