परीक्षित्! उस समय मगधराज जरासन्धकी सारी सेना मर चुकी थी। भगवान् बलरामजीने उपेक्षापूर्वक उसे छोड़ दिया था, इससे वह बहुत उदास होकर अपने देश मगधको चला गया॥ ३५॥
हतेषु सर्वानीकेषु नृपो बार्हद्रथस्तदा।
उपेक्षितो भगवता मगधान् दुर्मना ययौ॥ ३५
परीक्षित्! उस समय मगधराज जरासन्धकी सारी सेना मर चुकी थी। भगवान् बलरामजीने उपेक्षापूर्वक उसे छोड़ दिया था, इससे वह बहुत उदास होकर अपने देश मगधको चला गया॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.50.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 449) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/50/35/