श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

न वै शूरा विकत्थन्ते दर्शयन्त्येव पौरुषम्।

न गृह्णीमो वचो राजन्‍नातुरस्य मुमूर्षतः॥ २०

na vai śūrā vikatthante darśayantyeva pauruṣam|

na gṛhṇīmo vaco rājannāturasya mumūrṣataḥ|| 20

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने कहा—मगधराज! जो शूरवीर होते हैं, वे तुम्हारी तरह डींग नहीं हाँकते, वे तो अपना बल-पौरुष ही दिखलाते हैं। देखो, अब तुम्हारी मृत्यु तुम्हारे सिरपर नाच रही है। तुम वैसे ही अकबक कर रहे हो, जैसे मरनेके समय कोई सन्‍निपातका रोगी करे। बक लो, मैं तुम्हारी बातपर ध्यान नहीं देता॥ २०॥

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