॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.50.13
पश्यार्य व्यसनं प्राप्तं यदूनां त्वावतां प्रभो।
एष ते रथ आयातो दयितान्यायुधानि च॥ १३
paśyārya vyasanaṃ prāptaṃ yadūnāṃ tvāvatāṃ prabho|
eṣa te ratha āyāto dayitānyāyudhāni ca|| 13
अर्थ
‘भाईजी! आप बड़े शक्तिशाली हैं। इस समय जो यदुवंशी आपको ही अपना स्वामी और रक्षक मानते हैं, जो आपसे ही सनाथ हैं, उनपर बहुत बड़ी विपत्ति आ पड़ी है। देखिये, यह आपका रथ है और आपके प्यारे आयुध हल-मूसल भी आ पहुँचे हैं॥ १३॥