श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.5.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

वसुदेव उवाच

करो वै वार्षिको दत्तो राज्ञे दृष्टा वयं च वः।

नेह स्थेयं बहुतिथं सन्त्युत्पाताश्‍च गोकुले॥ ३१

karo vai vārṣiko datto rājñe dṛṣṭā vayaṃ ca vaḥ|

neha stheyaṃ bahutithaṃ santyutpātāśca gokule|| 31

अर्थ

वसुदेवजीने कहा—भाई! तुमने राजा कंसको उसका सालाना कर चुका दिया। हम दोनों मिल भी चुके। अब तुम्हें यहाँ अधिक दिन नहीं ठहरना चाहिये; क्योंकि आजकल गोकुलमें बड़े-बड़े उत्पात हो रहे हैं॥ ३१॥

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