उन्होंने ब्राह्मणोंको वस्त्र और आभूषणोंसे सुसज्जित दो लाख गौएँ दान कीं। रत्नों और सुनहले वस्त्रोंसे ढके हुए तिलके सात पहाड़ दान किये॥ ३॥✎ 140014011402205922352236
धेनूनां नियुते प्रादाद् विप्रेभ्यः समलंकृते।
तिलाद्रीन् सप्त रत्नौघशातकौम्भाम्बरावृतान्॥ ३
उन्होंने ब्राह्मणोंको वस्त्र और आभूषणोंसे सुसज्जित दो लाख गौएँ दान कीं। रत्नों और सुनहले वस्त्रोंसे ढके हुए तिलके सात पहाड़ दान किये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.5.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 151) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/5/3/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (6)
#1400 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): वंदीजनण् → वंदीजन
#1401 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): मागधञ् → मागध