किसी दूसरी गोपीने कहा—‘क्या अब वह हमें ले जाकर अपने मरे हुए स्वामी कंसका पिण्डदान करेगा? अब यहाँ उसके आनेका और क्या प्रयोजन हो सकता है?’ व्रजवासिनी स्त्रियाँ इसी प्रकार आपसमें बातचीत कर रही थीं कि उसी समय नित्यकर्मसे निवृत्त होकर उद्धवजी आ पहुँचे॥ ४९॥
किं साधयिष्यत्यस्माभिर्भर्तुः प्रेतस्य निष्कृतिम्।
इति स्त्रीणां वदन्तीनामुद्धवोऽगात् कृताह्निकः॥ ४९
किसी दूसरी गोपीने कहा—‘क्या अब वह हमें ले जाकर अपने मरे हुए स्वामी कंसका पिण्डदान करेगा? अब यहाँ उसके आनेका और क्या प्रयोजन हो सकता है?’ व्रजवासिनी स्त्रियाँ इसी प्रकार आपसमें बातचीत कर रही थीं कि उसी समय नित्यकर्मसे निवृत्त होकर उद्धवजी आ पहुँचे॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.46.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 421) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/46/49/