श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.49

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

गुरुणैवमनुज्ञातौ रथेनानिलरंहसा।

आयातौ स्वपुरं तात पर्जन्यनिनदेन वै॥ ४९

guruṇaivamanujñātau rathenānilaraṃhasā|

āyātau svapuraṃ tāta parjanyaninadena vai|| 49

अर्थ

बेटा परीक्षित्! फिर गुरुजीसे आज्ञा लेकर वायुके समान वेग और मेघके समान शब्दवाले रथपर सवार होकर दोनों भाई मथुरा लौट आये॥ ४९॥

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