बेटा परीक्षित्! फिर गुरुजीसे आज्ञा लेकर वायुके समान वेग और मेघके समान शब्दवाले रथपर सवार होकर दोनों भाई मथुरा लौट आये॥ ४९॥
गुरुणैवमनुज्ञातौ रथेनानिलरंहसा।
आयातौ स्वपुरं तात पर्जन्यनिनदेन वै॥ ४९
बेटा परीक्षित्! फिर गुरुजीसे आज्ञा लेकर वायुके समान वेग और मेघके समान शब्दवाले रथपर सवार होकर दोनों भाई मथुरा लौट आये॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 414) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/45/49/