श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

सरहस्यं धनुर्वेदं धर्मान् न्यायपथांस्तथा।

तथा चान्वीक्षिकीं विद्यां राजनीतिं च षड्विधाम्॥ ३४

sarahasyaṃ dhanurvedaṃ dharmān nyāyapathāṃstathā|

tathā cānvīkṣikīṃ vidyāṃ rājanītiṃ ca ṣaḍvidhām|| 34

अर्थ

इनके सिवा मन्त्र और देवताओंके ज्ञानके साथ धनुर्वेद, मनुस्मृति आदि धर्मशास्त्र, मीमांसा आदि, वेदोंका तात्पर्य बतलानेवाले शास्त्र, तर्कविद्या (न्यायशास्त्र) आदिकी भी शिक्षा दी। साथ ही सन्धि, विग्रह, यान, आसन, द्वैध और आश्रय—इन छः भेदोंसे युक्त राजनीतिका भी अध्ययन कराया॥ ३४॥

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