अब वे दोनों गुरुकुलमें निवास करनेकी इच्छासे काश्यपगोत्री सान्दीपनि मुनिके पास गये, जो अवन्तीपुर (उज्जैन) में रहते थे॥ ३१॥
अथो गुरुकुले वासमिच्छन्तावुपजग्मतुः।
काश्यं सान्दीपनिं नाम ह्यवन्तीपुरवासिनम्॥ ३१
अब वे दोनों गुरुकुलमें निवास करनेकी इच्छासे काश्यपगोत्री सान्दीपनि मुनिके पास गये, जो अवन्तीपुर (उज्जैन) में रहते थे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 411) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/45/31/