बहिन! देखो, इन पहलवानोंका एक-एक अंग वज्रके समान कठोर है। ये देखनेमें बड़े भारी पर्वत-से मालूम होते हैं। परन्तु श्रीकृष्ण और बलराम अभी जवान भी नहीं हुए हैं। इनकी किशोरावस्था है। इनका एक-एक अंग अत्यन्त सुकुमार है। कहाँ ये और कहाँ वे?॥ ८॥
क्व वज्रसारसर्वांगौ मल्लौ शैलेन्द्रसन्निभौ।
क्व चातिसुकुमारांगौ किशोरौ नाप्तयौवनौ॥ ८
बहिन! देखो, इन पहलवानोंका एक-एक अंग वज्रके समान कठोर है। ये देखनेमें बड़े भारी पर्वत-से मालूम होते हैं। परन्तु श्रीकृष्ण और बलराम अभी जवान भी नहीं हुए हैं। इनकी किशोरावस्था है। इनका एक-एक अंग अत्यन्त सुकुमार है। कहाँ ये और कहाँ वे?॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 402) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/8/