जब उसके प्रधान पहलवान मार डाले गये और बचे हुए सब-के-सब भाग गये, तब भोजराज कंसने अपने बाजे-गाजे बंद करा दिये और अपने सेवकोंको यह आज्ञा दी—॥ ३१॥
हतेषु मल्लवर्येषु विद्रुतेषु च भोजराट्।
न्यवारयत् स्वतूर्याणि वाक्यं चेदमुवाच ह॥ ३१
जब उसके प्रधान पहलवान मार डाले गये और बचे हुए सब-के-सब भाग गये, तब भोजराज कंसने अपने बाजे-गाजे बंद करा दिये और अपने सेवकोंको यह आज्ञा दी—॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 405) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/31/